जीवन में दर्द के, बीते लम्हों के, अनछुये एहसासो के ना जाने कितने सागर हिलोरे ले रहे हैं बस कभी इनकी कुछ बूँदें पन्नों पर आ जाती हैं और शब्द जुड़ कर कभी कविता का रुप ले लेते हैं और कभी यूँ ही सूख जाते हैं