Thursday, April 19, 2018





उस देश को बिटिया ना दीजो
जिस में वो अपनी माँ की आँखों में
उसके पूर्णता का एहसास नहीं
बल्कि एक गिरता आंसू हो

जिसमें वो पिता का अभिमान नहीं
असमय उसके कंधो का बोझ हो
चाचा मामा की आँखों में हवस की वजह हो

बिटिया ना दीजो
जब उसका बचपन लड़की
होने से बदल जाये
अपने ही घर में उसे छुप कर
जीना पड़े जाये

बिटिया ना दीजो उस देश को
जहाँ उसकी मासूमियत
बाँटी जाती हो धर्मों में
राजनीति की नाम पर
उसके इंसान होने का
अधिकार भी कुचल दिया जाता हो

ऐ खुदा बस ये दुआ कबूल कर मेरी


-एक मासूम बच्ची

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