उस देश को बिटिया ना दीजो
जिस में वो अपनी माँ की आँखों में
उसके पूर्णता का एहसास नहीं
बल्कि एक गिरता आंसू हो
जिसमें वो पिता का अभिमान नहीं
असमय उसके कंधो का बोझ हो
चाचा मामा की आँखों में हवस की वजह हो
बिटिया ना दीजो
जब उसका बचपन लड़की
होने से बदल जाये
अपने ही घर में उसे छुप कर
जीना पड़े जाये
बिटिया ना दीजो उस देश को
जहाँ उसकी मासूमियत
बाँटी जाती हो धर्मों में
राजनीति की नाम पर
उसके इंसान होने का
अधिकार भी कुचल दिया जाता हो
ऐ खुदा बस ये दुआ कबूल कर मेरी
-एक मासूम बच्ची


